मुंबईसेमी ने भारतीय नेविगेशन उपग्रहों के लिए 'ध्रुवप्रो' नामक एक रीकॉन्फ़िगरेबल GNSS रिसीवर चिप विकसित की है। यह चिप भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC का उपयोग करने में उपकरणों को सक्षम बनाती है, जिससे देश को विदेशी उपग्रह प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। कंपनी की स्थापना जनवरी 2024 में डॉ. विजय कंचेटला और प्रोफेसर राजेश ज़ेले ने की थी।
भारत का अपना उपग्रह नेविगेशन सिस्टम, NavIC, ISRO द्वारा निर्मित है और यह देश तथा उसके आसपास के क्षेत्र को कवर करता है। हालांकि, इस प्रणाली की प्रमुख चुनौती हमेशा ज़मीनी स्तर पर रही है, क्योंकि इसे सुनने के लिए उपयुक्त चिप्स की कमी थी। अधिकांश वाणिज्यिक रिसीवर चिप्स GPS का समर्थन करते थे, लेकिन NavIC का नहीं, जिससे भारतीय उपकरणों को अपनी स्वदेशी प्रणाली का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
इसी कमी को पूरा करने के लिए मुंबईसेमी की स्थापना IIT बॉम्बे में हुई, जहाँ इसके संस्थापकों ने वर्षों तक इस समस्या पर काम किया था। डॉ. विजय कंचेटला ने IIT बॉम्बे से रेडियो फ्रीक्वेंसी इंटीग्रेटेड सर्किट डिज़ाइन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और इंटेल में भी काम किया। प्रोफेसर राजेश ज़ेले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में पढ़ाते हैं और कार्नेगी मेलन से डॉक्टरेट धारक हैं। कंपनी IIT बॉम्बे के प्रौद्योगिकी व्यवसाय इन्क्यूबेटर, SINE में इन्क्यूबेटेड है।
मुंबई, महाराष्ट्र में मुख्यालय वाली यह सेमीकंडक्टर कंपनी, प्री-सीड फंडिंग के तहत SINE, IIT बॉम्बे से अज्ञात राशि प्राप्त कर चुकी है। उन्होंने 'ध्रुवप्रो' नामक अपना प्रमुख उत्पाद विकसित किया है, जो चार उपग्रह तारामंडलों को सपोर्ट करने में सक्षम है। कंपनी के अनुसार, उनके पास दो पेटेंट भी हैं, जो उनके तकनीकी नवाचार को दर्शाते हैं।